कभी देखा है कोई नया शेयर या प्रोडक्ट लॉन्च होते ही उसकी नब्जें बढ़ने लगती हैं और लोग "GMP ₹50" जैसे अंक बताने लगते हैं? यही ग्रे मार्केट प्रीमियम है। सरल शब्दों में यह एक अनौपचारिक कीमत है जो ऑफिशियल लिस्टिंग से पहले खुले बाजार में बनती है। लोग इसे शेयरों, मोबाइल, कार या लिमिटेड चीज़ों के लिए बोलते हैं। पर क्या इससे सच में फायदा होता है? और क्या यह भरोसेमंद है? चलिए सीधे बात करते हैं।
GMP वह प्रीमियम है जो औपचारिक मार्केट के बाहर बढ़ता-घटता रहता है। IPO के मामले में, जब किसी कंपनी का शेयर खुलने से पहले खरीद और बेच हो रही होती है, तो लोग अनुमान लगाते हैं कि लिस्पिंग पर कितना पैसा बनेगा। यही अनुमान ग्रे मार्केट प्रीमियम कहलाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी IPO का अनुमानित लिस्टिंग प्राइस ₹200 है और ग्रे मार्केट में उसे लोग ₹230 पर बोल रहे हैं, तो GMP ≈ ₹30 माना जाएगा।
ध्यान रखें: यह सरकारी या नियम-आधारित भाव नहीं है। यह सिर्फ एक संकेत है कि बाजार की रूचि कितनी है।
GMP बनता है क्योंकि मांग और आपूर्ति असममिति, हाइप, और सीमित उपलब्धता से बनती है। कभी-कभी ब्रोकर्स और आड-हॉक समूह कीमतें बढ़ाते हैं। इससे निवेशकों को फुर्सत से लगेगा कि बड़े फायदे हैं, पर असलियत में कई जोखिम हैं:
- मनमाना और बदलता भाव: GMP जल्दी बदल सकता है। सुबह ऊँचा, शाम तक गिर सकता है।
- धोखाधड़ी का खतरा: कुछ लोग फेक बिड या अफवाह फैलाकर कीमतें बढ़ाते हैं।
- सूचीकरण गारंटी नहीं: ऊँचा GMP लिस्टिंग पर ज़रूरी नहीं कि बड़ा मुनाफा दे। कई बार लिस्टिंग में घाटा भी होता है।
तो क्या करें? सीधे कदम अपनाएँ:
- भरोसेमंद सोर्स देखें: सिर्फ़ किसी वॉट्सएप संदेश पर भरोसा मत करें। आधिकारिक रजिस्ट्रार, NSE/BSE या भरोसेमंद वित्तीय साइटें देखें।
- अग्रिम भुगतान से बचें: ग्रे मार्केट में प्री-पेमेंट देने से बचें — बहुतेरे घोटाले इसी वजह से होते हैं।
- छोटा जोखिम लें: अगर आप प्रयोग करना चाहें तो छोटी रकम से शुरू करें और लिक्विडिटी पर ध्यान दें।
- वैरिफाई करें: अगर कोई वाहन या मोबाइल के प्रीमियम के बारे में बोल रहा है, तो रजिस्ड डीलर और बिलिंग स्टेटस जरूर चेक करें।
अगर आप IPO निवेश सोच रहे हैं, तो GMP एक संकेत तो दे सकता है पर निर्णय सिर्फ़ उस पर मत लें। कंपनी की मूलभूत जानकारी, प्रोस्पेक्टस, प्राइस बैंड और अपनी जोखिम क्षमता पर ज़्यादा भरोसा करें।
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