आप भी स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड में पैसा लगाना चाहते हैं, लेकिन कहाँ से शुरू करें, ये अक्सर उलझन बन जाता है। चलिए, सीधे आपके सवालों के जवाब देते हैं – कौन से कारक आपके पोर्टफोलियो को असर करते हैं और कैसे आप छोटे-छोटे कदमों से बड़ी जीत पा सकते हैं?
हाल ही में जारी केंद्रीय बजट 2025-26 ने टैक्स में कुछ बदलाव किये हैं जो खासकर रीटेल निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। डिविडेंड पर TDS की सीमा बढ़ाई गई, यानी अब आप अधिक डिविडेंड बिना भारी कटौती के ले सकते हैं। इस नियम का फायदा उठाने के लिए अपने शेयरों को ऐसे कंपनियों में रखें जिनका डिविडेंड रेट औसत से ऊपर हो।
साथ ही, बजट में शेयर और म्यूचुअल फंड के कर में नरमी का संकेत मिला है। यदि आप लॉन्ग‑टर्म एसेट्स में निवेश करते हैं, तो कैपिटल गेन टैक्स कम हो सकता है। यह बात याद रखें – निवेश करने से पहले अपने टैक्स प्लैन को अपडेट करना नहीं भूलें।
शेयर बाजार में बड़े नामों की झलक तो देखी जा सकती है, पर रीटेल निवेशक अक्सर छोटे‑छोटे स्टॉक्स या नई IPOs के साथ शुरुआत करते हैं। एक आम गलती है पूरे पैसे को एक ही स्टॉक में लगाना। इसे टालने के लिए एसेट अलोकेशन का प्रयोग करें – 40% शेयर, 30% म्यूचुअल फंड, 20% बॉन्ड और 10% कैश रिज़र्व रखें। ऐसा करने से जोखिम कम होता है और रिटर्न की संभावना बनी रहती है।
अगर आप अभी शेयर चुनने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं, तो वॉल्यूम और लिक्विडिटी देखें। दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम ज़्यादा वाले स्टॉक्स में उतार‑चढ़ाव कम रहता है, जिससे आप आसानी से खरीद‑बेच कर सकते हैं। साथ ही, कंपनी की बुनियादी बातों – जैसे कम debt, लगातार profits, और बेहतर management – पर फोकस करें।
एक और आसान तरीका है सिस्टमेटिक इन्भेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना। हर महीने छोटे‑छोटे अमाउंट डालने से आप दीर्घकालिक रिटर्न को कैप्चर कर सकते हैं, और बाजार के उतार‑चढ़ाव का असर कम हो जाता है।
आखिर में, ये याद रखें कि शेयर बाजार में कोई गारंटी नहीं। इसलिए हमेशा ऐसी राशि ही निवेश करें जो आप खोने के लिए तैयार हों। नियमित रूप से पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, मार्केट की खबरों से अपडेट रहें, और ज़रूरत पड़े तो प्रोफेशनल की सलाह लेने से न हिचकें।
सही जानकारी, सही रणनीति और थोड़ा धैर्य – यही तीन चीज़ें मिलकर रीटेल निवेशकों को बड़े सपने सच करने में मदद करती हैं। अब समय है आगे बढ़ने का, अपना पहला या अगला कदम उठाने का।
Adani Power ने 22 सितंबर को 1:5 अनुपात में अपना पहला स्टॉक स्प्लिट लागू किया, जिससे शेयर कीमत में 20% उछाल आया और नई सर्वाधिक मूल्य स्तर स्थापित हुआ। इस कदम से ₹10 वाले शेयर पाँच ₹2 वाले हो गए, जिससे रिटेल निवेशकों के लिए पहुँच आसान बनी। कंपनी ने वित्तीय परिणामों में 83% लाभ वृद्धि की घोषणा की और मोर्गन स्टेनली ने इसे Overweight रेटिंग के साथ 818 रुपये लक्ष्य दिया।
रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियाँ (एनटीपीसी) भर्ती के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट, rrbapply.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर 2024 है। यह भर्ती अभियान एनटीपीसी श्रेणी के तहत 8,000 से अधिक रिक्तियों को भरने का उद्देश्य रखता है।
केरल के वायनाड जिले में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ है, जिससे प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी किया है। इस घटना के कारण कोझिकोड- बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटे हैं। निवासी को घर में रहने की सलाह दी गई है। अगले 24 घंटों में भारी बारिश की संभावना है।
23 जुलाई 2024 को, भारतीय शेयर बाजार में मिश्रित संकेतों के साथ सप्ताह की शुरुआत हुई। एनएसई निफ्टी 50 में 31.05 अंकों या 0.13% की गिरावट आई और यह 24,478.20 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि बीएसई सेंसेक्स 81.16 अंकों या 0.10% की गिरावट के साथ 80,420.92 पर बंद हुआ। निवेशक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संभावित कर स्लैब परिवर्तन, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स पर घोषणाओं की प्रतीक्षा कर रहे थे।
पोप फ्रांसिस ने 21 नए कार्डिनल्स की घोषणा की है, जिसके चलते कार्डिनल कॉलेज का आकार काफी बड़ा हो गया है। इनमें से एक कार्डिनल तोरंटो के आर्चबिशप फ्रांसिस लियो हैं। नए कार्डिनल्स 8 दिसंबर को कंसीस्टरी नामक समारोह में अपने लाल टोपी प्राप्त करेंगे। इस नियुक्ति से पोप फ्रांसिस का प्रभाव और गहरा हो गया है, जिसका असर भविष्य में उनके उत्तराधिकारी के चुनाव पर पड़ेगा।
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में शहरी क्षेत्रों में अपार सफलता हासिल करते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में बीजेपी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। बीजेपी की यह जीत रणनीतिक संदेश और जातिगत समीकरणों के चलते संभव हुई। भाजपा की 'खर्ची और पर्ची' अभियान ने भी कांग्रेस के खिलाफ काम किया।