क्या आप दिल्ली विश्वविद्यालय की नई बदलती खबरों से अपडेट रहना चाहते हैं? यहाँ पर हम आपको DU की प्रमुख घटनाओं, परीक्षा डेट्स, रिज़ल्ट और कैंपस में चल रहे कार्यक्रमों के बारे में सरल भाषा में बताएंगे। बिना किसी जटिल शब्दों के, सिर्फ वही जो आपके लिए सच में काम का है।
हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश की भीड़ बढ़ती है। इस साल UG प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म 1 मार्च से खुला और आखिरी तारीख 30 मार्च तय हुई। आवेदन करते समय अपने हाई स्कूल के मार्क्स, फोटो और पहचान प्रमाण अपलोड करना न भूलें, नहीं तो फ़ॉर्म रद्द हो सकता है। यदि आप ओपन कॉलेज में भर्ती चाहते हैं, तो अग्रिम जमा रकम 1,500 रुपये ऑनलाइन जमा करनी होगी।
पुस्तकालय सदस्यता, छात्रावास और हॉस्टल के लिए अलग फॉर्म भरना होता है। कई बार डिमांड बहुत अधिक हो जाती है, इसलिए जहाँ संभव हो – क्लेरिकल्स के बाद ही फॉर्म जमा करिए, इससे आपका एप्लीकेशन थ्रेड में जल्दी आगे बढ़ेगा।
DU के परीक्षा परिणाम अब ऑनलाइन ही प्रकाशित होते हैं। परिणाम देखना चाहते हैं तो exam.du.ac.in पर अपना रोल नंबर और डेमोग्राफी डालें। अगर आपका परिणाम नहीं दिख रहा, तो एक-दो दिन बाद फिर से चेक करें या कॉलेज के अकादमिक ऑफिस से संपर्क करें। परिणाम आने के बाद, यदि आप रिटेक की योजना बना रहे हैं, तो फॉर्म भरने की अंतिम तिथि हमेशा अंतिम परीक्षा के दो हफ्ते बाद होती है।
कैंपस में होने वाले फेस्टिवल, सेमिनार और स्पोर्ट्स इवेंट्स भी छात्रों के लिये बड़े अवसर होते हैं। इस साल ‘दुर्गा पूजा महोत्सव’ 15‑17 अक्टूबर को आयोजित हो रहा है, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और छात्र प्रतियोगिताएँ होंगी। भाग लेने से आपका रिज्यूमे भी चमकेगा और नए दोस्त भी बनेंगे।
अगर आप लाॅब या रिसर्च प्रोजेक्ट में इंटरेस्ट रखते हैं, तो प्रोफेसर के साथ जल्दी संपर्क करें। कई बार प्रोफेसर अपने रिसर्च ग्रुप में इंटर्न्स ले लेते हैं और यह एक अच्छा एक्सपीरिएंस बन सकता है। याद रखें, एंट्री के लिये आपके ग्रेड और प्रोफ़ाइल दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं।
डिग्री को पूरा करने के बाद प्लेसमेंट भी एक बड़ा सवाल है। DU की प्लेसमेंट सेल हर साल अगस्त‑सितंबर में कंपनियों को कैंपस रिक्रूटमेंट के लिए बुलाती है। रिज़्यूमे तैयार रखिए, इंटरव्यू की प्रैक्टिस करिए और अपने प्रोजेक्ट्स को पोर्टफोलियो में शामिल करिए। अक्सर कम्पनियों के पास ऑनलाइन टेस्ट होते हैं, इसलिए कोडिंग या एबस्ट्रैक्ट थिंकिंग की प्रैक्टिस जरूरी है।
संक्षेप में, दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई, कैंपस लाइफ़ और करियर के सारे पहलू आपस में जुड़े हैं। इस टैग पेज पर आप सभी नई खबरों, अपडेट्स और टिप्स एक ही जगह पा सकते हैं। बस इस पेज को बुकमार्क कर लें, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी हाथ से ना निकल जाए।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP ने 4 में से 3 शीर्ष पद जीते। आर्यन मान अध्यक्ष बने, जबकि उपाध्यक्ष पद NSUI के राहुल झांसला ने जीता। सचिव कुनाल चौधरी और सह-सचिव दीपिका झा (दोनों ABVP) जीते। 52 केंद्रों पर 195 बूथों और 711 EVM के साथ 39.45% मतदान हुआ। हाई कोर्ट ने विजय जुलूसों पर रोक लगाई थी।
प्रिया सरोज की रिंकू सिंह से सगाई की अफवाहों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, उनके पिता तुफानी सरोज ने यह स्पष्ट किया है कि इनके बीच बातों का सिलसिला चल रहा है लेकिन कोई सगाई नहीं हुई है। प्रिया उत्तर प्रदेश के मछलीशहर क्षेत्र से लोकसभा सदस्य हैं और एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आती हैं।
भारत के राष्ट्रपति ने कई राज्यों के लिए नए राज्यपालों की नियुक्ति की है। इसमें पूर्व रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान को झारखण्ड का राज्यपाल, तमिलिसाई सौंदरराजन को तेलंगाना का राज्यपाल, रमेश बैस को झारखण्ड का राज्यपाल और फागू चौहान को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियां संबंधित राज्यों में शासन और प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए की गई हैं।
उत्तर भारत में Swine Flu के मामलों में जबर्दस्त उछाल आया है। दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्य बुरी तरह प्रभावित हैं, अब तक 20,414 मामले और 347 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। वैक्सीनेशन, मास्क और समय रहते इलाज को जरूरी बताया जा रहा है।
विजय की फिल्म 'GOAT' का ट्रेलर 17 अगस्त, 2024 को रिलीज़ हुआ और इसे व्यापक प्रशंसा मिली। तमिल, तेलुगु, और हिंदी में यह फिल्म 5 सितंबर से सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है। दर्शकों ने फिल्म के ट्रेलर की तारीफ करते हुए इसे 'इंटरनेशनल क्वालिटी' का बताया है। 'GOAT' समय यात्रा का फैंटेसी ड्रामा है जिसमें विजय दोहरी भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में शहरी क्षेत्रों में अपार सफलता हासिल करते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में बीजेपी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। बीजेपी की यह जीत रणनीतिक संदेश और जातिगत समीकरणों के चलते संभव हुई। भाजपा की 'खर्ची और पर्ची' अभियान ने भी कांग्रेस के खिलाफ काम किया।